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मास्टर मनोहर लाल नागपाल; एक अध्यापक जिनसे पढ़ा है ‘करतारपुर’

करतारपुर मेल (शिव कुमार राजू):

जीत ही उनको मिली जो हार से जाकर लड़े है
हार के भय से लड़े वो धराशाही पड़े है 
हर विजय संकल्प के पग चूमती देखी गई 
वह किनारे ही बचे जो सिंधू को बांधे खड़े है।
               
जिंदगी बच्चों को पढ़ाते हुए गुजार दी। बहुत खुशी होती है जब कोई पढ़ ले। जनून, डेडीकेशन बहुत, सादा सा पहरावा, लेकिन महान विचारों वाले इस व्यक्तित्व की सोच व संदेश समाज में अपने ही मायने रखते है। आज भी कुछ बच्चे पढने आते है। मैंने आज तक किसी बच्चे से पैसे नहीं मांगे। क्यूंकि शिक्षा का कोई मूल्य नहीं होता। परमात्मा ने अध्यापक बनाया मेरे लिए ये किसी वरदान से कम नहीं।
ये विचार करतारपुर की एक ऐसी शख्सियतके है जिनसे हजारों विद्यार्थियों ने व आगे उनके बच्चों ने शिक्षा ग्रहण की। ये शख्सियत व उक्त विचार मास्टर मनोहर लाल नागपाल जी के है। 4 फरवरी 1941 को पिता चरणजीव लाल व माता स्वर्गीय लज्यावती के घर पैत्रिक गाँव वेरोवल जिला अमृतसर में जन्म लेने वाले मास्टर नागपाल जी का परिवार आजादी के समय व अन्य कारणों के चलते करतारपुर नगर आ बसा। दादा श्री चानण राम जी अध्यापक थे। जिनसे टीचर बनने की इच्छा हुई। 

मास्टर जी अक्सर यही बोलते है; बच्चों ‘एह साल ओखे-आन वाले सोखे’


मैट्रिक डी.ए.वी. स्कूल करतारपुर, डी.ए.वी. कालज में फैकल्टी आफ आर्ट्स, 1961 में बी.एस.सी. नॉन मेडिकल दोआबा कॉलेज, एम.ए. इंग्लिश, एम.एड., 1962 में बी.टी. करने के पश्चात सबसे पहले सुल्तानपुर के एक स्कूल में बच्चों को गणित पढ़ाया। फिर महा पंजाब के कांगड़ा में सरकारी स्कूल में 5 साल तक ज्ञान का उजाला फ़ैलाने के बाद मास्टर जी की पोस्टिंग सीनीयर सेकंडरी स्कूल करतारपुर में हुई। 1969 में मास्टर जी की शादी जंडियाला गुरु के रहने वाली दर्शना से हुई जोकि खुद भी अध्यापिका थीं। मास्टर जी का एक बेटा विवेक कुमार नागपाल व दो पोतियाँ है।
दोआबा कॉलेज में अपने अध्यापक प्रो. डी.एन. वासुदेवा व प्रिंसीपल वी.आर. तनेजा को अपना रोल मोडल मानकर मास्टर जी ने पूरी निष्ठा, जनून, लग्न से बच्चों को पढ़ाया। 1998 में वह करतारपुर के सरकारी सीनीयर सेकंडरी स्कूल में बतौर इंग्लिश टीचर रिटायर हुए। 
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ਪੜੋ ਮਾਸਟਰ ਨਾਗਪਾਲ ਜੀ ਦੀਆਂ ਕੁੱਝ ਲਿਖਤਾਂ 



अपनी जिंदगी में पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। बस एक ट्यूमर है जिसे वह रोजाना योगा करके, मेडिकल सहायता लेकर काबू किये हुए है। उन्होंने लुधियाना के प्रेम समाज के गुरु महाराजा कमलबीर जी से नाम दान लिया है। अध्यापक के साथ साथ एक अच्छे लेखक मास्टर नागपाल जी कविताएँ, कहानियां आदि के जरिये इन दिनों समाज की सेवा कर रहे है।
 
पढ़ाई दौरान बच्चों को यह बात कि ‘एह साल औखे-आन वाले सोखे’ के जरिये वह कड़ी मेहनत करने का संदेश देते थे और आज उनके विद्यार्थी जब कभी उनसे मिलने आते है तो इस बात को नहीं भूलते। ‘जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि’ का हवाला देते हुए मास्टर जी ने समाज, बच्चों, युवाओं को सदा सकारात्मक रहने व आगे बढने का संदेश दिया।
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